कविता और संगीत के संगम में सजी अंतरराष्ट्रीय जलंगी साहित्य पत्रिका–सहजयोद्धा मंच की 624वीं साहित्यिक संध्या

कविता, संगीत और सृजनात्मक अभिव्यक्ति के सुंदर समागम के साथ अंतरराष्ट्रीय जलंगी साहित्य पत्रिका–सहजयोद्धा मंच का 624वाँ साहित्य समागम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। शुक्रवार, 1 मई 2026 को आयोजित इस मासिक साहित्यिक कार्यक्रम ने एक बार फिर साहित्यप्रेमियों के लिए एक जीवंत और प्रेरणादायक मंच प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम का संचालन श्रीमती चिन्मयी विश्वास ने किया। सायं 5 बजे से आरंभ होकर रात्रि 9 बजे तक चले इस आयोजन ने उपस्थित दर्शकों को कविता, गीत और भावनाओं की एक अनूठी यात्रा पर ले गया।

उद्घाटन सत्र में श्रीमती अजंता आड्या ने अपने मधुर गायन से कार्यक्रम का शुभारंभ किया, जिससे वातावरण सुरमय हो उठा। इसके बाद सोनारपुर से आईं श्रीमती रीता मंडल ने कविता पाठ किया। क्रमशः श्री स्वपन देवनाथ, श्री प्रकृति दास चक्रवर्ती, हावड़ा के सांकराइल से आए कवि वासुदेव दास, डॉ. परिमल घोष, श्री राधाश्याम दास, श्री हिमाद्री मुखर्जी, श्री सुनीति विकास चौधुरी तथा श्री आशीष गिरी ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के अगले चरण में संगीत प्रस्तुतियों ने विशेष आकर्षण बटोरा। श्री समीर बरन दत्त ने अंग्रेजी गीत प्रस्तुत किया, जबकि सिंथेसाइज़र विशेषज्ञ डॉ. सौम्य बोस, श्री ध्रुव हलदार, श्रीमती रूपा गुप्ता और पत्रिका की संपादिका श्रीमती चिन्मयी विश्वास ने अपने-अपने संगीत से माहौल को और भी ऊर्जावान बना दिया। इसी क्रम में एडवोकेट श्रीकुमार चक्रवर्ती ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अंतरराष्ट्रीय जलंगी पत्रिका को शुभकामनाएं दीं और भविष्य में सहयोग का आश्वासन भी दिया।

अंत में अध्यक्ष श्री रामपद विश्वास के संबोधन और सामूहिक रूप से गाए गए देशभक्ति गीत “जन गण मन अधिनायक” के साथ इस साहित्य समागम का समापन हुआ।

समग्र रूप से यह साहित्यिक संध्या सभी साहित्यप्रेमियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुई, जिसमें कविता, संगीत, संवाद और आपसी सौहार्द का सुंदर संगम देखने को मिला।

कविता और संगीत के संगम में सजी अंतरराष्ट्रीय जलंगी साहित्य पत्रिका–सहजयोद्धा मंच की 624वीं साहित्यिक संध्या

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