Indian College of Cardiodiabetology and Metabolic Diseases (ICCMD) ने शहर में कार्डियोमेटाबोलिक डिजीज पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया। इस बैठक में विशेषज्ञों ने हृदय और मेटाबोलिक रोगों के बढ़ते खतरे तथा उनकी रोकथाम पर विस्तृत चर्चा की।
विशेषज्ञों के अनुसार, कार्डियोमेटाबोलिक रोग ऐसी स्वास्थ्य स्थितियों का समूह है, जिसकी पहचान उच्च रक्तचाप, रक्त में शर्करा की अधिक मात्रा, पेट के आसपास अतिरिक्त चर्बी तथा असामान्य कोलेस्ट्रॉल/ट्राइग्लिसराइड स्तर से होती है। यह सिंड्रोम हृदय रोग, टाइप-2 डायबिटीज और स्ट्रोक के जोखिम को काफी बढ़ा देता है। चिकित्सकों ने बताया कि मोटापा और निष्क्रिय जीवनशैली इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं।
कार्यक्रम में Wich Elm Laboratories के चेयरमैन सुकांत भट्टाचार्य, डॉ. आशीष मित्र, डॉ. तपस बंद्योपाध्याय, डॉ. पारिजात डे तथा ICCMD के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. ए.एन. राय सहित कई प्रतिष्ठित चिकित्सक उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के दौरान विशेषज्ञों ने संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर स्वास्थ्य जांच को कार्डियोमेटाबोलिक रोगों की रोकथाम के लिए आवश्यक बताया। कार्यक्रम का उद्देश्य आम लोगों और चिकित्सा समुदाय में जागरूकता बढ़ाना था, ताकि बढ़ते हृदय एवं मधुमेह संबंधी मामलों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सके।

