ज्ञान, संस्कार और परंपरा के सुंदर संगम के साथ ‘सरस्वती भंडार’ की ओर से सरस्वती पूजा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर पुस्तकों और कच्ची हल्दी के वितरण के माध्यम से ज्ञान और स्वास्थ्य का संदेश समाज तक पहुँचाया गया।
कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि आज जो फूल ताज़ा दिखाई देते हैं, वे कल मुरझा जाते हैं, लेकिन आज बांटा गया ज्ञान दिन-ब-दिन और उज्ज्वल होता जाता है तथा इंसानियत को बेहतर बनाने में सहायक होता है। इसी विश्वास को आधार बनाकर ‘सरस्वती भंडार’ की लीडर, प्रख्यात वक्ता और भाषा-संस्कृति की सक्रिय कार्यकर्ता झरना भट्टाचार्य ने विद्यार्थियों और किशोरों के बीच वर्णपरिचय सहित पुस्तकें वितरित कीं और सरस्वती पूजा संपन्न की।
इस अवसर पर उन्होंने किशोरों को कच्ची हल्दी के महत्व के बारे में बताया। झरना भट्टाचार्य ने समझाया कि हिंदू परंपरा में सरस्वती पूजा के दिन माँ को हल्दी क्यों अर्पित की जाती है और शरीर पर हल्दी क्यों लगाई जाती है। उन्होंने कहा कि कच्ची हल्दी हमारे शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होती है।
अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “किताबें बांटकर मैंने अक्षरों की माला अर्पित की और अच्छे शब्द बांटकर अपने तथा समूची इंसानियत के लिए ज्ञान की प्रार्थना की।”
‘सरस्वती भंडार’ की यह पहल सरस्वती पूजा को केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित न रखते हुए, शिक्षा, स्वास्थ्य और मानवीय मूल्यों से जोड़ने का एक प्रेरणादायी प्रयास बनकर सामने आई।

