पूर्वांचल संस्कृति केंद्र की पहल पर पराक्रम दिवस का आयोजन, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती श्रद्धा से मनाई गई

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत पूर्वांचल संस्कृति केंद्र की पहल पर नेताजी सुभाषचंद्र बोस की 129वीं जयंती के अवसर पर पराक्रम दिवस भव्य रूप से मनाया गया। यह आयोजन दक्षिण 24 परगना जिले के सुभाष ग्राम में संपन्न हुआ।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2021 से भारत सरकार ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में घोषित किया है। इसी क्रम में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्कृति मंत्रालय की ओर से यह कार्यक्रम सुभाष ग्राम रेलवे स्टेशन के समीप रेलवे मैदान में आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत कोदालिया स्थित नेताजी की पैतृक भूमि पर माल्यार्पण और प्रभात फेरी के साथ हुई, जिसके बाद रेलवे मैदान में मुख्य आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य नवप्रजन्म, विशेषकर युवाओं में नेताजी के पराक्रम, देशभक्ति और आत्मचेतना के विचारों को जागृत करना रहा।

दिनभर विविध सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इनमें नेताजी पर आधारित लाइव आर्ट कैंप विशेष आकर्षण रहा, जिसमें लगभग 200 कलाकारों ने चित्रांकन किया। साथ ही स्कूल और कॉलेज के विद्यार्थियों के लिए नेताजी पर आधारित क्विज प्रतियोगिता आयोजित की गई। मलखम जैसी सशक्त शारीरिक कला की प्रस्तुति ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया, जो पूरी तरह नेताजी की प्रेरणा से ओतप्रोत थी।

इसके अतिरिक्त, लगभग विलुप्त हो चुकी पुतुल नाच (पुतली नृत्य) कला के माध्यम से नेताजी के जीवन, संघर्ष और कर्मदक्षता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।

इस विशेष दिन को और भी व्यापक रूप देने के लिए संस्कृति मंच की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्य आयोजन अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह, कोलकाता के विक्टोरिया मेमोरियल हॉल सहित देश के लगभग 13 स्थानों पर संपन्न हुए।

पूर्वांचल संस्कृति केंद्र की पहल पर पराक्रम दिवस का आयोजन, नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती श्रद्धा से मनाई गई

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