कोलकाता के बाबूघाट स्थित मिनी गंगासागर के बारे में तो अधिकांश लोग जानते हैं, लेकिन भवानीपुर में भी एक ऐसा मिनी गंगासागर है, जिसकी चर्चा कम ही होती है। 2 जनवरी से 24 जनवरी 2026 तक गंगासागर जाने वाले श्रद्धालुओं और साधुओं के लिए यहां भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। प्रतिदिन लगभग पांच हजार साधुओं, दिव्यांगों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया जाएगा।
पिछले तीन दशकों से अधिक समय से भवानीपुर के एक पुराने प्रतिष्ठित घर के प्रांगण में देश और राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए साधु-संत एकत्र होते हैं। कई साधु बाबूघाट नहीं जाकर भवानीपुर के इस मिनी गंगासागर में विश्राम करते हैं और यहीं से सीधे गंगासागर के पवित्र धाम की ओर प्रस्थान करते हैं।
भवानीपुर में बाबूघाट की तरह माधुकरी की आवश्यकता नहीं पड़ती। लगभग 40 वर्षों से सरदार जोत सिंह गुरु के वंशज इस सेवा कार्य को निरंतर चला रहे हैं। भवानीपुर क्षेत्र के जीआईएस ग्रुप से जुड़े सिख समुदाय के लोग पूरे आयोजन की व्यवस्था संभालते हैं।
भंडारे में घी की पूरी, सब्जी, खिचड़ी के साथ-साथ दक्षिणा, सर्दियों के कपड़े और अन्य आवश्यक वस्तुएं भी श्रद्धालुओं को दान स्वरूप प्रदान की जाती हैं। यह सेवा कार्य मानवता और सेवा भाव का अनुपम उदाहरण बनकर सामने आया है।

