भगवान महावीर जयंती के पावन अवसर पर आयोजित “विश्वशांति अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार 2026” समारोह में अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कन्नड़ कवि, चिंतक, फिल्म निर्माता, किसान और सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता नागतिहल्ली रमेश को सम्मानित किया जाएगा। यह आयोजन 31 मार्च 2026 को प्रज्ञान भवन, 4/2 रूपचांद मुखर्जी लेन में शाम 4 बजे से 6 बजे तक आयोजित होगा।
इस अवसर पर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर की जयंती को श्रद्धा और गौरव के साथ स्मरण किया गया। उनके द्वारा दिए गए अहिंसा, सत्य, संयम और करुणा के सिद्धांत आज भी मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि दुनिया में कोई भी सामान्य नागरिक युद्ध नहीं चाहता; युद्ध वहीं जन्म लेता है जहां मानवता का क्षय हो जाता है और घृणा व आधिपत्य की भावना हावी हो जाती है।
समारोह में यह भी रेखांकित किया गया कि जहां मानवता जीवित रहती है, वहां समय-समय पर महान आत्माओं का जन्म होता है, जो नए आदर्शों और सिद्धांतों के माध्यम से समाज को नई दिशा देते हैं। लगभग 2600 वर्ष पहले, जब संसार युद्धों से जर्जर था, तब भगवान महावीर ने अहिंसा का मार्ग दिखाकर मानवता को नई राह प्रदान की थी।
इस वर्ष का पुरस्कार नागतिहल्ली रमेश को उनके मानवीय दृष्टिकोण, सामाजिक प्रतिबद्धता और करुणामय जीवनदर्शन के लिए दिया जा रहा है। आम लोग उन्हें स्नेहपूर्वक “अव्वान्ना” कहकर पुकारते हैं, जो उनके भीतर की मातृत्वपूर्ण संवेदना का प्रतीक है। उनका जीवन दर्शन इस विचार पर आधारित है—“यदि मैं अच्छा नहीं कर सकता, तो कम से कम किसी का नुकसान न करूं।”
कार्यक्रम में एक काव्यात्मक श्रद्धांजलि भी प्रस्तुत की गई, जिसमें मानवता, करुणा और प्रेम की खोज को विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों—जैसे बेथलेहेम, वेटिकन सिटी, गुरु नानक के गुरुद्वारों और बुद्ध की करुणा से जुड़े स्थानों—के माध्यम से दर्शाया गया।
संक्षिप्त परिचय के अनुसार, नागतिहल्ली रमेश का जन्म 1 जून 1967 को कर्नाटक के मांड्या जिले के नागतिहल्ली गांव में हुआ था। साधारण पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने साहित्य, सिनेमा, संगीत, पर्यावरण और सामाजिक चिंतन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उनकी काव्य पुस्तक “The Sea and The Rain” ने कन्नड़ साहित्य में नई संवेदना पैदा की है, जबकि उनकी लघु फिल्म “The Roots” को 16 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुके हैं।
उन्हें विभिन्न राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है, जिसमें 2025 में कोलंबो में आयोजित विश्व मानवाधिकार दिवस समारोह भी शामिल है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज जब विश्व अनेक संघर्षों और युद्धों से जूझ रहा है, तब भगवान महावीर के अहिंसा के संदेश को याद करना अत्यंत प्रासंगिक है।

