कोलकाता के युवा कथाकार हिंदोल मित्र की दूसरी कहानी-पुस्तक पाठकों के बीच

किशोरावस्था से ही शब्दों से दोस्ती और कविता-कहानी को जीवन का साथी बनाने वाले युवा कथाकार हिंदोल मित्र की दूसरी प्रकाशित कहानी-पुस्तक अब पाठकों के हाथों में है। Shobhabazar क्षेत्र के एक निम्नमध्यवर्गीय बंगाली परिवार में जन्मे हिंदोल मित्र ने साहित्य साधना की लंबी यात्रा तय की है। इस बीच उनका कविता-संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है।

हिंदोल मित्र की कहानियाँ पढ़ते ही पात्रों की सामाजिक पृष्ठभूमि स्पष्ट हो जाती है— निम्नवर्गीय लोगों का संघर्ष, मन की जटिल परतें और यथार्थ की गहरी प्रतिध्वनि। मानव मन का रहस्य आज भी पूरी तरह उद्घाटित नहीं हो सका है; इसी अनजाने अंधेरे में लेखक अपनी कहानियों का प्रकाश खोजते हैं।

उनकी कई रचनाओं में मैजिक रियलिज़्म की झलक मिलती है। ‘लोभ’ कहानी में एक कार्यालय कर्मचारी भ्रष्टाचार के भय से ऊँची इमारत की खिड़की से काले धन की बारिश कर देता है। भ्रष्टाचार की निंदा करने वाला सुब्रत ही बाद में अभाव के दबाव में उसी पैसे को बटोरने दौड़ पड़ता है। यथार्थ और अलौकिकता के सूक्ष्म मिश्रण से कहानी अत्यंत प्रभावशाली बनती है।

‘जय’ कहानी में मनोज का मानसिक भय और स्वप्न में उठता तूफान— जहाँ वह नाव की पतवार संभाल कर साहस वापस पाता है— आत्मविश्वास की नई सुबह का प्रतीक बन जाता है। ‘कथा’ में मछुआरे सरस की मृत्यु के बाद उसके लौट आने का प्रश्न पाठकों को सोचने पर मजबूर करता है।

‘रक्त’ कहानी में मानवीय संवेदना की गूंज है, जहाँ परिवार के भीतर दुर्लभ रक्त-समूह की आवश्यकता रिश्तों को नई परिभाषा देती है। वहीं ‘नरखादक’ में रक्तिम और तनुश्री का प्रेम सामाजिक बंधनों को तोड़कर यह सिद्ध करता है कि प्रेम शरीर नहीं, मन का बंधन है। ‘मुक्ति’ कहानी हिंदू-मुस्लिम परिवारों के संबंधों के माध्यम से सामाजिक सौहार्द का संदेश देती है।

मैजिक रियलिज़्म की अवधारणा 1925 में जर्मन चित्रकला से प्रारंभ होकर 1940 के दशक में साहित्य में आई और 1967 में कोलंबियाई लेखक Gabriel García Márquez के नोबेल पुरस्कार प्राप्त उपन्यास One Hundred Years of Solitude से विश्वव्यापी पहचान मिली। उसी परंपरा की एक विशिष्ट बंगाली अभिव्यक्ति हिंदोल मित्र की लेखनी में दिखाई देती है।

विविध चरित्र-चित्रण, सूक्ष्म वर्णन शैली और गहरी मानवीय संवेदनाओं के माध्यम से हिंदोल मित्र ने स्वयं को एक समर्थ कथाकार के रूप में स्थापित किया है। यह केवल कहानी-पुस्तक नहीं, बल्कि यथार्थ और जादुई अनुभूति का सेतु, मानव मन की खोज और प्रेम की अनवरत विजय-गाथा है।

कोलकाता के युवा कथाकार हिंदोल मित्र की दूसरी कहानी-पुस्तक पाठकों के बीच

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