सुरक्षा डायग्नोस्टिक लिमिटेड द्वारा ‘विटामिन डी संकट’ पर इंटरएक्टिव विशेषज्ञ सत्र, बचपन से वयस्कता तक जागरूकता पर जोर

पूर्वी भारत की अग्रणी डायग्नोस्टिक चेन सुरक्षा डायग्नोस्टिक लिमिटेड (“सुरक्षा क्लिनिक एंड डायग्नोस्टिक्स”) ने दक्षिण कोलकाता के एकबालपुर केंद्र में ‘विटामिन डी संकट: बचपन से वयस्कता तक’ विषय पर एक इंटरएक्टिव विशेषज्ञ सत्र का आयोजन किया। इस सत्र में जनरल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. सौम्यदीप दास तथा ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. सौविक बर्धन ने भाग लिया और विटामिन डी की कमी से जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।

विशेषज्ञों ने बताया कि विटामिन डी की कमी एक “साइलेंट क्राइसिस” है, जो बचपन से लेकर वयस्कता तक व्यापक रूप से फैल रही है। बैठी-बैठाई जीवनशैली, धूप में कम समय बिताना, सनस्क्रीन का अधिक उपयोग और पोषण की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। बच्चों में इससे रिकेट्स और विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, जबकि वयस्कों में हड्डियों का कमजोर होना, ऑस्टियोपोरोसिस, मांसपेशियों की कमजोरी, हृदय रोग और मधुमेह जैसी दीर्घकालिक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

अनुसंधानों के अनुसार, भारत में 70 से 100 प्रतिशत तक आबादी विटामिन डी की कमी से प्रभावित हो सकती है। मूड में बदलाव, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली, हड्डियों में दर्द, लगातार थकान और मांसपेशियों की कमजोरी जैसे लक्षण अक्सर उम्र या तनाव का परिणाम समझ लिए जाते हैं, जबकि ये विटामिन डी की कमी के संकेत हो सकते हैं। 45 वर्ष से अधिक आयु के प्रत्येक दो भारतीयों में से एक ने जोड़ों के दर्द की शिकायत की है। दक्षिण भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 40 वर्ष से अधिक आयु के वयस्कों में घुटनों के ऑस्टियोआर्थराइटिस की व्यापकता लगभग 34.6% पाई गई है, जबकि 40 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में यह आंकड़ा 55% तक दर्ज किया गया है।

डॉ. सौम्यदीप दास ने कहा, “बच्चों में विटामिन डी की कमी केवल हड्डियों को कमजोर नहीं करती, बल्कि यह उनके विकास, प्रतिरक्षा प्रणाली और स्वस्थ भविष्य की नींव को भी प्रभावित करती है।”
वहीं डॉ. सौविक बर्धन ने कहा, “विटामिन डी की कमी एक मौन महामारी है। जागरूकता, पर्याप्त धूप और उचित सप्लीमेंटेशन से हम फ्रैक्चर, ऑस्टियोपोरोसिस और मांसपेशियों के दर्द के मामलों में उल्लेखनीय कमी ला सकते हैं।”

इस अवसर पर चेयरमैन एवं संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ. सोमनाथ चटर्जी ने कहा कि इस विशेषज्ञ सत्र का उद्देश्य समाज में बचपन से वयस्कता तक विटामिन डी की कमी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने नियमित जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त धूप और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया।

1992 में स्थापित सुरक्षा क्लिनिक एंड डायग्नोस्टिक्स आज देश का तीसरा सबसे बड़ा डायग्नोस्टिक ब्रांड बन चुका है। यह संस्था पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी और चिकित्सा परामर्श सहित 2,300 से अधिक परीक्षण सेवाएं प्रदान करती है। इसका केंद्रीय रेफरेंस लैब कॉलेज ऑफ अमेरिकन पैथोलॉजिस्ट (CAP) तथा NABL से मान्यता प्राप्त है, जबकि उन्नत डायग्नोस्टिक केंद्र NABH से अनुमोदित हैं। संस्था पश्चिम बंगाल, बिहार, असम और मेघालय सहित चार राज्यों में 65 उन्नत डायग्नोस्टिक आउटलेट और लगभग 166 सैंपल कलेक्शन सेंटर संचालित करती है।

सुरक्षा डायग्नोस्टिक लिमिटेड द्वारा ‘विटामिन डी संकट’ पर इंटरएक्टिव विशेषज्ञ सत्र, बचपन से वयस्कता तक जागरूकता पर जोर

बाये से दाए:
डॉ. शौविक बर्धन: एमबीबीएस, एमएस (ऑर्थोपेडिक्स), एमआरसीएस (भाग ए)
हड्डी रोग विभाग, सुरक्षा क्लिनिक और डायग्नोस्टिक्स

डॉ. सौमोदीप दास: एमबीबीएस
सीसीएटीएच (यूके), सीसीईबीडीएम (सीएएल), एसएएसी (यूएसए)
सामान्य चिकित्सा विभाग, सुरक्षा क्लिनिक एवं डायग्नोस्टिक्

 

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