Kumartuli के प्रसिद्ध मृत्तिका शिल्प क्षेत्र के पास रहने वाले पूर्व फुटबॉलर और प्रशिक्षक Rajib Guha लंबे समय से इस क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए हुए हैं। उनकी उपलब्धियों और संघर्ष की कहानी जानने के लिए “कोलकाता न्यूज नाइन्टीन” की एक विशेष टीम ने उनके आवास और खेल मैदान पर जाकर उनका सीधा साक्षात्कार लिया।
साक्षात्कार में राजीव गुहा ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि उनका जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में कुम्हारटुली क्षेत्र में हुआ। बचपन से ही उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने खेल के प्रति अपना जुनून कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने बताया कि परिवार का भरण-पोषण करने के लिए वे बड़ा बाजार इलाके में फेरी लगाकर काम करते थे और उसके बाद ही फुटबॉल अभ्यास के लिए समय निकालते थे।
राजीव गुहा का सपना था कि वे एक बड़े फुटबॉलर बनें और कोलकाता की तीन प्रमुख टीमों के लिए खेलें, लेकिन कम उम्र में ही उनके पिता के निधन के कारण उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई। परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई, जिसमें उनकी मां, दो भाई और एक बहन शामिल थे। इसके बाद उन्होंने जीवन संघर्ष के साथ आजीविका चलाने के साथ-साथ खेल को भी जारी रखा।
उनके फुटबॉल करियर की शुरुआत Veterans Sports Club के कोच Achyut Banerjee के मार्गदर्शन में हुई, जहां उन्होंने फुटबॉल की बुनियादी शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने Amiya Ghosh, जो East Bengal FC के जूनियर कोच थे, के साथ 1988-89 में सब-जूनियर टीम का प्रतिनिधित्व किया।
साल 1990 में उन्हें युवा भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिला। इसके अलावा उन्होंने Subroto Cup में Madhyamgram High School की ओर से भी खेला।
राजीव गुहा की यह प्रेरणादायक कहानी न केवल संघर्ष और समर्पण का उदाहरण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों के लिए प्रयास जारी रखना कितना महत्वपूर्ण है।

