दुर्गापूजा से पहले भारतीय परंपरा, संस्कृति और स्वदेशी वस्त्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कोलकाता के राजा एस.सी. मल्लिक रोड पर ‘द ऑरा गैलरी’ का भव्य शुभारंभ किया गया। यह साई खादी की एक नई पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय हस्तशिल्प, हस्तकरघा, खादी और पारंपरिक परिधानों को व्यापक पहचान दिलाना है।
उद्घाटन समारोह में प्रसिद्ध अभिनेत्री सोनाली चौधरी और अभिनेता अभ्रजीत चक्रवर्ती मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस अवसर पर संस्था के दोनों संचालक रिंकू सिंह और उदिप्ता जेना ने बताया कि ‘द ऑरा गैलरी’ केवल एक वस्त्र बिक्री केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और शिल्पकला को समर्पित एक सच्ची श्रद्धांजलि है।
उन्होंने बताया कि यहां पारंपरिक साड़ियों के साथ-साथ कुर्ता, कुर्ती, पंजाबी (कुर्ता) और अन्य भारतीय परिधानों का आकर्षक संग्रह उपलब्ध है। संस्था का प्रमुख उद्देश्य भारतीय पारंपरिक परिधानों को लोकप्रिय बनाना तथा देश के विभिन्न राज्यों के बुनकरों और शिल्पकारों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित वस्त्रों को उचित सम्मान और बाजार उपलब्ध कराना है।
रिंकू सिंह और उदिप्ता जेना ने कहा कि उनके संग्रह का बड़ा हिस्सा देश के विभिन्न हैंडलूम क्लस्टरों और कारीगर समुदायों से सीधे प्राप्त किया गया है। प्रत्येक वस्त्र केवल एक परिधान नहीं, बल्कि किसी परिवार की आजीविका, एक समृद्ध परंपरा और पीढ़ियों से चली आ रही शिल्पकला की विरासत का प्रतीक है। इसी विरासत को संरक्षित और सम्मानित करना ‘द ऑरा गैलरी’ का मूल उद्देश्य है।
संस्था का मुख्य संदेश है—“Tradition over Trends – Wear the Swadeshi Thread”, अर्थात क्षणिक फैशन की बजाय भारतीय परंपरा और स्वदेशी वस्त्रों को अपनाने का आह्वान।
अभिनेत्री सोनाली चौधरी और अभिनेता अभ्रजीत चक्रवर्ती ने कहा कि दुर्गापूजा से पहले देश के विभिन्न राज्यों से लाए गए हस्तनिर्मित और पारंपरिक वस्त्रों का यह विशाल संग्रह निश्चित रूप से ग्राहकों को आकर्षित करेगा तथा भारतीय शिल्प और संस्कृति के प्रति लोगों का विश्वास और बढ़ाएगा।
इस अवसर पर संस्था ने अपने चार प्रमुख संकल्प भी साझा किए। इनमें ग्राहकों को उचित मूल्य पर उच्च गुणवत्ता वाले भारतीय पारंपरिक वस्त्र उपलब्ध कराना, भारतीय बुनकरों एवं कारीगरों को आर्थिक और सामाजिक सहयोग देना, पर्यावरण-अनुकूल एवं हस्तनिर्मित परिधानों को बढ़ावा देना तथा प्रत्येक ग्राहक को ईमानदार, पारदर्शी और आत्मीय सेवा प्रदान करना शामिल है।
संस्था ने विश्वास व्यक्त किया कि यह नई पहल भारतीय हस्तकरघा, खादी और पारंपरिक परिधानों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ-साथ स्वदेशी उद्योग और देशभर के कारीगरों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी।

