विश्व डूबने से बचाव दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में एक ओर दो वर्षीय बच्चे की जान बचने पर मां की भावुक कृतज्ञता देखने को मिली, वहीं दूसरी ओर बाल संसद के एक प्रतिनिधि ने वयस्कों से सीधा सवाल पूछकर सभी का ध्यान डूबने से होने वाली मौतों की रोकथाम के प्रभावी क्रियान्वयन की ओर आकर्षित किया। कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश स्पष्ट था—जीवन बचाया जा सकता है, यदि नीतियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
कार्यक्रम में एक ऐसी घटना साझा की गई, जिसमें घर के पास स्थित तालाब में एक दो वर्षीय बच्चा अचेत अवस्था में तैरता हुआ मिला। उसे बाहर निकालने के बाद उसकी कोई प्रतिक्रिया नहीं थी। उसी समय चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (CINI) की प्रशिक्षित सामुदायिक प्रतिनिधि मंजू और सोनामणि तत्काल सहायता के लिए आगे आईं। स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक के सहयोग से बच्चे को प्राथमिक उपचार और जीवनरक्षक सीपीआर (CPR) दिया गया तथा लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित निकटतम सरकारी अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई।
अस्पताल में चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों ने तुरंत उपचार शुरू किया। सामुदायिक स्तर पर समय रहते दी गई प्राथमिक चिकित्सा, सरकारी स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और चिकित्सकों के संयुक्त प्रयास से बच्चे की जान बच गई।
कार्यक्रम में बच्चे के माता-पिता ने मंजू, सोनामणि, स्थानीय ग्रामीण चिकित्सक तथा सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि डूबने के बाद शुरुआती कुछ मिनटों में सही कदम उठाना, समय पर परिवहन और शीघ्र उपचार किसी भी जीवन को बचाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
चाइल्ड इन नीड इंस्टीट्यूट (CINI) द्वारा आयोजित इस समारोह में मंजू और सोनामणि सहित उन सामुदायिक प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया जिन्होंने संकट के समय लोगों की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हाल के जल-संबंधी हादसों में साहस और तत्परता दिखाने वाले कोलकाता पुलिस परिवार के पांच सदस्यों को भी विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में कोलकाता पुलिस के देबाशीष बैद्य ने बताया कि जल दुर्घटनाओं से निपटने के लिए प्रशिक्षित बचावकर्मी, जेट स्की और विशेष रेस्क्यू उपकरण उपलब्ध हैं। उन्होंने नागरिकों से नदियों, तालाबों और अन्य जलाशयों के आसपास सतर्क एवं जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की अपील की।
संस्था के अनुसार अब तक 8,000 से अधिक सामुदायिक स्वयंसेवकों और अग्रिम पंक्ति के कर्मियों को सीपीआर और आपातकालीन बचाव का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। ये प्रशिक्षित लोग अपने-अपने क्षेत्रों में आपदा के समय लोगों की सहायता कर रहे हैं और अनेक मामलों में जीवन बचाने में सफल रहे हैं।
CINI की सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. इंद्राणी भट्टाचार्य ने कहा, “जिन समुदायों के साथ हम काम करते हैं, वही हमारे सबसे बड़े शिक्षक हैं। प्रशिक्षित सामुदायिक प्रतिनिधि उस सीख को व्यवहार में लाकर लोगों की जान बचा रहे हैं। यदि समाज को तैयार किया जाए तो बदलाव निश्चित है।”
हालांकि कार्यक्रम के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक तब आया जब दक्षिण दिनाजपुर की बाल संसद के एक प्रतिनिधि ने सवाल उठाया कि दिसंबर 2023 में भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी डूबने से मृत्यु रोकथाम संबंधी राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों को वर्ष 2026 तक व्यवहार में लागू करने की दिशा में संबंधित संस्थाओं और एजेंसियों ने कितनी प्रगति की है।
यह प्रश्न छोटा था, लेकिन उसका महत्व अत्यंत व्यापक था। इससे यह संदेश मिला कि केवल नीतियां बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका प्रभावी क्रियान्वयन ही बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
“Unite to Turn the Tide” थीम पर आयोजित यह कार्यक्रम विश्व डूबने से बचाव दिवस 2026 के बहु-राज्यीय जनजागरूकता अभियान का हिस्सा था, जिसकी शुरुआत 10 जुलाई को ओडिशा से हुई थी। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल एवं केंद्र सरकार के प्रतिनिधि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), कोलकाता पुलिस, रामकृष्ण मिशन, विभिन्न शिक्षण संस्थानों, नागरिक संगठनों, अंतरराष्ट्रीय सहयोगी संस्थाओं तथा राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. मानस प्रतिम राय तथा विश्व स्वास्थ्य संगठन के जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं राष्ट्रीय प्रोफेशनल अधिकारी डॉ. मोहम्मद आशिल ने वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डूबने से होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार, पंचायत, स्थानीय प्रशासन, आपातकालीन सेवाओं, शोधकर्ताओं, नागरिक संगठनों और समुदायों को मिलकर कार्य करना होगा।
कार्यक्रम के दौरान फ्लोट टू लिव, सुरक्षित जल-उद्धार और सीपीआर का व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। बाल संसद के सदस्यों और डूबने से बचाव दल ने नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जल सुरक्षा का संदेश भी लोगों तक पहुंचाया।
CINI के लीड – इंजरी प्रिवेंशन एंड नेशनल एडवोकेसी, सुजय राय ने कहा, “एक जीवन बचाना केवल एक व्यक्ति को बचाना नहीं, बल्कि पूरे परिवार को अपूरणीय क्षति से बचाना है। स्थानीय सहयोग और प्रभावी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के बीच समन्वय ही इस पहल की सबसे बड़ी शक्ति है।”
कार्यक्रम समाप्त हो गया, मंच की रोशनी भी बुझ गई, लेकिन बाल संसद के उस छोटे प्रतिनिधि का सवाल सभी के मन में गूंजता रहा—2023 की राष्ट्रीय दिशा-निर्देश जारी होने के बाद जमीनी स्तर पर आखिर कितनी प्रगति हुई?
अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि इस प्रश्न का उत्तर केवल शब्दों तक सीमित रहेगा या फिर वास्तव में बच्चों की जान बचाने वाले ठोस कदमों के रूप में सामने आएगा।

