गोवा ने राष्ट्रीय सम्मेलन में सतत अवसंरचना और विरासत संरक्षण की दूरदर्शी सोच प्रस्तुत की

गोवा राज्य अवसंरचना विकास निगम (GSIDC) द्वारा नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित द लीला पैलेस में “गोअन आर्किटेक्चर एंड सस्टेनेबिलिटी” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का सफल आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, प्रसिद्ध वास्तुकारों, शहरी योजनाकारों, सतत विकास विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों तथा विभिन्न देशों के विशेषज्ञों ने भाग लेकर सतत विकास और विरासत-आधारित विकास के भविष्य पर व्यापक चर्चा की।

सम्मेलन का उद्घाटन गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, भारत सरकार के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, राज्यसभा सांसद सदानंद शेट तानावड़े तथा देश-विदेश से आए विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। उद्घाटन सत्र में वक्ताओं ने सतत अवसंरचना, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार शहरी विकास के प्रति गोवा की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत ने कहा कि गोवा की स्थापत्य विरासत केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य के विकास की प्रेरणा भी है। उन्होंने कहा कि राज्य तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए भी पर्यावरणीय संतुलन, सांस्कृतिक पहचान और टिकाऊ विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है। उनका कहना था कि यह सम्मेलन वास्तुकारों, योजनाकारों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक साझा मंच प्रदान करता है, जहां जलवायु-अनुकूल, नवाचार आधारित और विरासत-संवेदनशील विकास मॉडल पर विचार-विमर्श किया जा सकता है।

सम्मेलन के दौरान चार प्रमुख विषयों पर विशेषज्ञ पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। इनमें गोअन वास्तुकला एवं संदर्भ आधारित डिजाइन, विरासत संरक्षण एवं सतत आवास, ऊर्जा दक्षता एवं ग्रीन बिल्डिंग प्रमाणन, तथा जलवायु-अनुकूल निर्माण सामग्री एवं सतत निर्माण पद्धतियां शामिल थीं। इन चर्चाओं में TERI, Charles Correa Foundation, INTACH, GRIHA Council, विश्व बैंक, IFC, Centre for Science and Environment, Auroville Earth Institute, यूरोपीय संघ, रॉयल डेनिश एंबेसी और नीदरलैंड्स दूतावास सहित अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए।

सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य तीव्र शहरीकरण और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने के साथ-साथ नवीन प्रौद्योगिकियों, प्रभावी नीतिगत हस्तक्षेपों और सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से जलवायु-लचीले एवं टिकाऊ अवसंरचना विकास को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम के दौरान GoVAN उत्पादों की एक विशेष प्रदर्शनी भी आयोजित की गई, जिसमें प्रतिभागियों को गोवा की स्थानीय नवाचार क्षमता, पारंपरिक शिल्पकला और उद्यमिता से जुड़े उत्पादों को करीब से देखने और समझने का अवसर मिला।

सम्मेलन का समापन समापन सत्र (Valedictory Session) के साथ हुआ, जिसमें विभिन्न चर्चाओं से प्राप्त प्रमुख सुझावों और निष्कर्षों को प्रस्तुत किया गया। इसके बाद आयोजित नेटवर्किंग हाई-टी में सरकारी प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, वास्तुकारों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच आपसी संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिला।

यह राष्ट्रीय सम्मेलन गोवा की उस दूरदर्शी सोच को पुनः स्थापित करने में सफल रहा, जिसके तहत राज्य सहयोग, नवाचार और ज्ञान-साझाकरण के माध्यम से सतत अवसंरचना, विरासत संरक्षण और जलवायु-अनुकूल शहरी विकास के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

गोवा ने राष्ट्रीय सम्मेलन में सतत अवसंरचना और विरासत संरक्षण की दूरदर्शी सोच प्रस्तुत की

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