विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत National Library of India ने MASA Forum और Mantras Foundation के सहयोग से ‘एनवायरनमेंट राउंडटेबल 3.0’ का आयोजन किया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देशभर से पर्यावरण विशेषज्ञों, नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और सामाजिक विचारकों ने भाग लिया तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण अभियान और एक अनूठी पहल “कॉफी विद ए बुक” के उद्घाटन के साथ हुई। इसका उद्घाटन नेशनल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया के महानिदेशक Ajay Pratap Singh तथा Kolkata Municipal Corporation की आयुक्त Smita Pandey ने संयुक्त रूप से किया।
इस अवसर पर अजय प्रताप सिंह ने कहा, “सतत प्रगति की शुरुआत इस बात को सुनिश्चित करने से होती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ें। यदि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य चाहते हैं, तो विकास और प्रकृति के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है।”
कार्यक्रम के दौरान ‘एनवायरनमेंट चैंपियन क्विज़ 2026’, ‘इको चैंपियन क्लब’ तथा ‘परिबेश बंधु सम्मान’ जैसी नई पहलों का शुभारंभ भी किया गया। ‘परिबेश बंधु सम्मान’ का उद्देश्य पर्यावरण-अनुकूल दुर्गा पूजा आयोजनों को प्रोत्साहित करना और समाज में हरित सोच को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में Swati Nandi, Acharya Bhagwan Das, Ankur Chaturvedi, Ira Saha, Atul Singh, Abhishek Yadav, Anil Murarka, Arun Kothari तथा Vikas Jaiswal सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए।
वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वृक्षारोपण अभियानों तक सीमित नहीं रह सकता। बढ़ती पर्यावरणीय चुनौतियों और मानव-निर्मित आपदाओं से निपटने के लिए व्यक्तिगत सामाजिक जिम्मेदारी (ISR), जिम्मेदार उपभोग, संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग तथा टिकाऊ जीवनशैली को अपनाना समय की मांग है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष M. P. Khemka ने कहा, “हर व्यक्ति, संस्था और उद्योग को यह समझना होगा कि पर्यावरण की रक्षा कोई विकल्प नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। पर्यावरण संरक्षण के लिए व्यापक सामाजिक क्रांति की आवश्यकता है।”
MASA फ़ोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष Vibhor Tandon ने कहा, “पर्यावरण संकट केवल नीतियों से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे व्यवहार और जीवनशैली से भी संबंधित है। वास्तविक परिवर्तन तब आएगा जब प्रत्येक नागरिक अपनी खपत और जीवनशैली के निर्णयों के प्रति स्वयं जिम्मेदार बनेगा।”
वहीं, मंत्रास फ़ाउंडेशन की राष्ट्रीय सचिव Pragya Jhunjhunwala ने कहा, “सस्टेनेबिलिटी केवल कॉर्पोरेट एजेंडा तक सीमित नहीं रह सकती। इसे व्यक्तिगत जिम्मेदारी, जागरूकता और सामूहिक भागीदारी के माध्यम से जन-आंदोलन का रूप देना होगा।”
देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधियों, उद्योग जगत के नेताओं, सस्टेनेबिलिटी विशेषज्ञों और सामाजिक संगठनों की भागीदारी ने इस आयोजन को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मंच बना दिया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश स्पष्ट था कि पृथ्वी और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए सरकार, उद्योग और समाज के साथ-साथ प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक सुरक्षित और स्वस्थ पर्यावरण प्रदान किया जा सके।

