प्रख्यात ओडिसी नृत्यांगना Dona Ganguly ने Kellogg College में एक विशेष ओडिसी नृत्य कार्यशाला का आयोजन किया, जिसके माध्यम से भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गरिमा, सौंदर्य और समृद्ध कथात्मक परंपराओं को विश्व के सबसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक तक पहुंचाया गया।
कार्यशाला में भाग लेने वाले छात्रों और विश्वविद्यालय समुदाय के सदस्यों को ओडिसी नृत्य की मूलभूत अवधारणाओं, इसकी सौंदर्यात्मक विशेषताओं तथा भावनात्मक अभिव्यक्ति की बारीकियों से परिचित कराया गया। भारत की सबसे प्राचीन और प्रतिष्ठित शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक ओडिसी की विशिष्ट गतियों, लयबद्धता, मूर्तिकला से प्रेरित मुद्राओं और कहानी कहने की कला को प्रतिभागियों ने निकटता से समझा। इस संवादात्मक एवं आकर्षक सत्र के माध्यम से उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गहरी अनुभूति हुई।
यह कार्यशाला University of Oxford के शैक्षणिक वातावरण में सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने तथा वैश्विक कलात्मक परंपराओं की विविधता का उत्सव मनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई।
इस अवसर पर डोना गांगुली ने कहा, “पिछले वर्ष कैम्ब्रिज और इस वर्ष ऑक्सफोर्ड तक ओडिसी की यात्रा को आगे बढ़ाने का अवसर मेरे लिए अत्यंत गर्व और कृतज्ञता का विषय है। केलॉग कॉलेज, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में इस कार्यशाला का संचालन करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मेरे लिए ओडिसी केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक स्मृति की जीवंत अभिव्यक्ति है, जहां लय प्रार्थना बन जाती है, गति भाषा बन जाती है और भावनाएं एक सेतु का कार्य करती हैं। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस कला को प्रस्तुत करना विशेष अनुभव होता है, क्योंकि इससे विभिन्न संस्कृतियों के लोग भारत को केवल शब्दों के माध्यम से नहीं, बल्कि संगीत, नृत्य और भावनाओं के माध्यम से समझ पाते हैं। प्रतिभागियों का उत्साह अत्यंत प्रेरणादायक था और मैं इस परंपरा को सीमाओं से परे ले जाने तथा भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्धि को दुनिया भर के दर्शकों तक पहुंचाने के अवसर के लिए आभारी हूं।”
कार्यक्रम के दौरान Eeshani Bendale ने कहा, “केलॉग कॉलेज, ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में श्रीमती डोना गांगुली का स्वागत करना हमारे लिए सम्मान की बात रही। ओडिसी जैसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली पर उनकी कार्यशाला ने छात्रों को भारतीय संस्कृति की गहराई से परिचित कराया। उनकी प्रतिभा, ज्ञान और कला के प्रति समर्पण हम सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है।”
यह कार्यशाला भारतीय शास्त्रीय कलाओं के प्रति विश्वभर में बढ़ती रुचि का प्रमाण बनी और सांस्कृतिक संवाद के लिए एक सार्थक मंच सिद्ध हुई। इस पहल ने प्रतिभागियों को भारत की समृद्ध कलात्मक विरासत से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान किया। ऐसे आयोजनों के माध्यम से ओडिसी नृत्य भौगोलिक सीमाओं को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच भारतीय संस्कृति के प्रति समझ, सम्मान और सराहना को निरंतर बढ़ावा दे रहा है।

